अन्न, जल, वनस्पति और पृथ्वी के प्रति कृतज्ञता रखते हुए जप करें। साधना सात्त्विक रखें और भोजन की बर्बादी न करें।
मूल मन्त्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं शाकम्भर्यै नमः
शाकम्भरी माता की मूल उपासना, अन्न-जल की प्रचुरता और सर्वकार्य सिद्धि के लिए
१०८ बार
सरल मन्त्र
ॐ शाकम्भर्यै नमः
शाकम्भरी माता के दैनिक स्मरण और आशीर्वाद प्राप्ति के लिए
११ या २१ बार
शाकम्भरी गायत्री मन्त्र
ॐ शाकम्भर्यै विद्महे | शताक्ष्यै धीमहि | तन्नो देवी प्रचोदयात्
माता की विशेष कृपा, प्रकृति से सामंजस्य और आत्मशक्ति की वृद्धि के लिए
२१ या १०८ बार
अन्न-जल समृद्धि मन्त्र
ॐ ह्रीं शाकम्भरी देव्यै, अन्नं देहि, जलं देहि, धनं देहि, सुखं देहि, सर्वान् कामान् पूरय पूरय नमः
अन्न, जल, धन और जीवन में समृद्धि तथा मनोकामना पूर्ति के लिए
२१ या १०८ बार (शुक्रवार को विशेष फलदायी)
शाकम्भरी रक्षा मन्त्र
ॐ श्रीं ह्रीं शाकम्भरि महादेवि, दुर्भिक्ष नाशय नाशय, रोग हरय हरय, भक्तान् रक्ष रक्ष, स्वाहा
अकाल, रोग, दुर्भिक्ष और संकट से रक्षा तथा परिवार की सुरक्षा के लिए
११ बार (अष्टमी या नवमी को विशेष फलदायी)
मार्गदर्शन
सरल सात्त्विक भोजन अर्पित करें और उसे सम्मान से बाँटें। किसी जरूरतमंद को भोजन कराना इस भक्ति का सुन्दर रूप है।

