
शाकम्भरी माता
देवी सौ वर्षों के सूखे में ऋषियों की पुकार पर प्रकट होने का वचन देती हैं। सौ नेत्रों से उन्हें देखने के कारण वे शताक्षी कहलाएँगी।
मूल मन्त्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं शाकम्भर्यै नमः
दिन
शुक्रवार
रंग
हरा
भोग
फल
पर्व
नवरात्रि
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शाकम्भरी माता की कथा और आध्यात्मिक महत्व
अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।
देवी सौ वर्षों के सूखे में ऋषियों की पुकार पर प्रकट होने का वचन देती हैं। सौ नेत्रों से उन्हें देखने के कारण वे शताक्षी कहलाएँगी।
शाकम्भरी का पोषणमयी रूप
देवी सौ वर्षों के सूखे में ऋषियों की पुकार पर प्रकट होने का वचन देती हैं। सौ नेत्रों से उन्हें देखने के कारण वे शताक्षी कहलाएँगी।
वर्षा लौटने तक वे अपने शरीर से उत्पन्न शाक से प्राणियों का पोषण करेंगी। इसी रूप में वे शाकम्भरी के नाम से पूजी जाएँगी।
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