
शाकम्भरी माता
शाकम्भरी माता देवी का वह पोषणमयी स्वरूप हैं जो अन्न, शाक, फल, औषधि, जल और करुणा से जगत का पालन करती हैं।
मूल मन्त्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं शाकम्भर्यै नमः
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संक्षिप्त तथ्य
मुख्य भाव
पोषण, अन्न-समृद्धि, करुणा, आरोग्य और देवी-रक्षा
पवित्र स्वरूप
दुर्गा का पोषणमयी रूप, जिन्हें भक्त शताक्षी नाम से भी स्मरण करते हैं
शाकम्भरी माता की कथा और आध्यात्मिक महत्व
अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।
शाकम्भरी माता देवी का वह पोषणमयी स्वरूप हैं जो अन्न, शाक, फल, औषधि, जल और करुणा से जगत का पालन करती हैं।
एक समय में एक अनुभाग शांत मन और भक्ति-भाव से पढ़ें।
जगत का पोषण करने वाली माता
शाकम्भरी माता देवी का अत्यन्त करुणामयी स्वरूप हैं। वे शाक, फल, अन्न, जड़, औषधि और हरियाली के माध्यम से जीवों का पालन करने वाली माता मानी जाती हैं। शाकम्भरी नाम का भाव है वह देवी जो शाक और वनस्पति से जगत को पोषण देती हैं। इस उपासना में भोजन केवल वस्तु नहीं, बल्कि देवी की कृपा माना जाता है।
पुराण और लोक-भक्ति की परम्पराओं में उनका सम्बन्ध भयानक अकाल और जीवों की पीड़ा की कथा से जुड़ा है। देवी करुणा से प्रकट होती हैं और शताक्षी, अर्थात हजार नेत्रों वाली माता, के रूप में भी स्मरण की जाती हैं। उनकी करुणा से जल और वनस्पति का जीवन लौटता है। यह कथा स्पष्ट संकेत देती है कि अन्न, जल और प्रकृति का अपमान जीवन को कमजोर करता है, और कृतज्ञता से किया गया स्मरण पोषण को पूजा बना देता है।
उत्तर भारत और राजस्थान की अनेक परम्पराओं में शाकम्भरी या शाकुम्भरी देवी के प्रसिद्ध स्थल हैं। कोई भक्त उन्हें दुर्गा मानकर पूजता है, कोई अन्नपूर्णा-भाव से, और कोई वन-प्रकृति की रक्षक माता के रूप में। उनकी कृपा खेत, पशु, परिवार, आरोग्य और अन्न-सुरक्षा से जोड़ी जाती है।
भक्ति और दैनिक अर्थ
घर की पूजा में दीपक, जल, पुष्प, फल और मौसमी सब्जियाँ रखी जा सकती हैं। अनेक भक्त हरे शाक या सात्त्विक भोजन का भोग लगाकर उसे सम्मान से बाँटते हैं। शाकम्भरी माता की उपासना में भोजन की बर्बादी विशेष रूप से अनुचित मानी जानी चाहिए, क्योंकि यह पूजा पोषण के प्रति श्रद्धा सिखाती है।
यह पृष्ठ साधना को सरल रखता है: आरती से हृदय खुलता है, चालीसा से स्मरण दृढ़ होता है, नामों से चिन्तन गहरा होता है, मन्त्र से एकाग्रता आती है और पूजा-विधि से गृह-पूजन का क्रम स्पष्ट होता है।
भक्ति नोट
शाकम्भरी माता की पूजा भोजन, जल, वनस्पति और धरती को देवी का प्रसाद मानकर सम्मान करना सिखाती है।
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दिन
शुक्रवार
रंग
हरा
भोग
फल
पर्व
नवरात्रि
लोकप्रिय खोजें
वे सामान्य खोज-वाक्य जिनसे भक्त इस देवता और संबंधित पाठ तक पहुँचते हैं।

