माता सीता पवित्रता, भक्ति और धर्म की आदर्श प्रतिमूर्ति हैं। शुद्ध हृदय से उनकी पूजा करने पर शांति, समृद्धि, दांपत्य सुख और उत्तम चरित्र की प्राप्ति होती है। वे सरलता, श्रद्धा, श्वेत पुष्प, फल और सच्ची प्रार्थना से अत्यंत प्रसन्न होती हैं।
तैयारी
प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठें
स्नान करके स्वच्छ एवं हल्के रंग के वस्त्र धारण करें (सफेद, पीला या भगवा शुभ माना जाता है)
पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें
माता सीता जी की मूर्ति या चित्र को स्वच्छ वेदी पर स्थापित करें (संभव हो तो श्रीराम जी का चित्र भी साथ रखें)
वेदी को पुष्प, आम के पत्तों और रंगोली से सजाएँ
मूर्ति या चित्र को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर स्थापित करें
पूजा सामग्री
माता सीता जी की मूर्ति या चित्र
भगवान श्रीराम का चित्र (वैकल्पिक किंतु अनुशंसित)
सफेद पुष्प या कमल का फूल
ताज़े तुलसी पत्र
अगरबत्ती
घी का दीपक
चंदन
कुमकुम और हल्दी
अक्षत (साबुत चावल)
मिठाई (खीर, पेड़ा या मिश्री)
फल (विशेष रूप से केला और सेब)
नारियल
पंचामृत (वैकल्पिक)
घंटी
सीता अष्टोत्तर शतनामावली या सीता चालीसा की पुस्तक
संकल्प
- 1
माता सीता जी के समक्ष शांत भाव से बैठें
- 2
आँखें बंद करके हाथ जोड़ें
- 3
पूजा का सच्चा संकल्प लें
- 4
शांति, सुख, पवित्रता और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें
आवाहन
- 1
घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएँ
- 2
मधुर स्वर में घंटी बजाएँ
- 3
मंत्र जप करें:
- 4
ॐ सीतायै नमः
- 5
या जप करें: जय सिया राम, जय सिया राम, सिया राम, सिया राम
पूजा विधि
- 1
माता सीता जी को जल अर्पित करें
- 2
चंदन और कुमकुम का तिलक लगाएँ
- 3
अक्षत और श्वेत पुष्प अर्पित करें
- 4
तुलसी पत्र अर्पित करें
- 5
मिठाई, फल और नारियल अर्पित करें
- 6
माता सीता के दिव्य स्वरूप, उनकी पवित्रता, भक्ति और करुणा का ध्यान करें
महत्वपूर्ण
माता सीता पवित्रता की साक्षात् प्रतिमूर्ति हैं। उनकी पूजा स्वच्छ मन और सरल भक्ति से करें। प्रेमपूर्वक अर्पित किया गया एक पुष्प भी उन्हें अत्यंत प्रिय होता है।
मंत्र जप और पाठ
- 1
निम्न में से किसी एक या सभी का पाठ करें
- 2
सीता अष्टोत्तर शतनामावली (108 नाम)
- 3
सीता चालीसा
- 4
राम रक्षा स्तोत्र
- 5
जय सिया राम मंत्र जप
आरती
- 1
घी के दीपक से आरती करें
- 2
सीता माता की आरती या श्रीराम स्तुति गाएँ
- 3
आरती के समय घंटी बजाएँ
- 4
कृतज्ञता व्यक्त करें और आशीर्वाद की प्रार्थना करें
प्रसाद वितरण
- 1
सबसे पहले माता सीता जी को भोग अर्पित करें
- 2
कुछ क्षण शांत भाव से बैठें
- 3
प्रसाद परिवार के सदस्यों में वितरित करें
- 4
प्रसाद को श्रद्धा और सम्मानपूर्वक ग्रहण करें
महत्वपूर्ण निर्देश
पूजा के दौरान शारीरिक और मानसिक पवित्रता बनाए रखें
पूजा के दिन व्रत या सात्विक भोजन का पालन करें
सीता नवमी और राम नवमी विशेष रूप से शुभ मानी जाती हैं
प्रतिदिन 'जय सिया राम' का जप अत्यंत मंगलकारी माना जाता है
पूजा करते समय क्रोध, कटु वाणी और नकारात्मक विचारों से बचें

