सीता माता पवित्रता, धैर्य, करुणा और अटल भक्ति की साक्षात् प्रतिमूर्ति हैं। वे जनकपुत्री, राघवप्रिया और जगत जननी हैं। उनके मंत्रों का जप कोमल, एकाग्र और शुद्ध मन से करें। प्रातःकाल स्नान के पश्चात् स्वच्छ आसन पर बैठकर, हृदय में पवित्रता और श्रद्धा का भाव रखते हुए इन मंत्रों का जप करें।
सीता माता मूल मंत्र
ॐ सीतायै नमः
दैनिक पूजा, मन की शांति और सीता माता की कृपा प्राप्ति के लिए सरलतम और सर्वश्रेष्ठ मंत्र
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जानकी मंत्र
ॐ जानक्यै नमः
पारिवारिक सामंजस्य, गृहशांति और पवित्रता की प्राप्ति के लिए
21 या 108
सीताराम नाम जप
सीताराम सीताराम सीताराम जय सीताराम। सीताराम सीताराम सीताराम जय सीताराम।।
सीता-राम के प्रेमपूर्ण युगल स्मरण, मन की शुद्धि और भक्ति भाव जागृत करने के लिए
श्रद्धानुसार
सीता माता ध्यान मंत्र
ॐ ह्रीं सीतायै रामप्रियायै जानक्यै नमो नमः
ध्यान साधना, आंतरिक शक्ति और धैर्य की प्राप्ति के लिए विशेष रूप से उपयोगी
21 या 108
जगत जननी मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं जानकीदेव्यै नमः। जगत जनन्यै सीतायै राघवप्रियायै नमो नमः।।
जीवन में सुख-समृद्धि, परिवार की रक्षा और माँ की कृपा दृष्टि हेतु
11 या 21
सीता गायत्री मंत्र
ॐ जानकीदेव्यै विद्महे रामप्रियायै धीमहि। तन्नः सीता प्रचोदयात्।।
बुद्धि की शुद्धि, सत्य वाणी, सात्त्विकता और आध्यात्मिक उन्नति के लिए
21 या 108
सीता-राम अष्टाक्षर मंत्र
ॐ श्री सीता रामाभ्यां नमः
दांपत्य प्रेम, गृहस्थ जीवन की शांति और राम-सीता के युगल आशीर्वाद हेतु
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मार्गदर्शन
सीता माता की उपासना कोमल, सात्त्विक और हृदय की गहराई से होती है। मंत्र जप के साथ सत्य वाणी अपनाएँ, परिवार का सम्मान करें और दूसरों के प्रति करुणा रखें। यदि परिवार या गुरु परंपरा में कोई विशेष विधि हो, तो उसे सर्वोच्च प्राथमिकता दें। सबसे बड़ा मंत्र शुद्ध भाव और अटल भक्ति है।

