सीता माता

सीता माता

सीता माता पवित्रता, शक्ति, धैर्य, भक्ति और धर्ममय करुणा की मूर्ति मानी जाती हैं।

सीता माता मूल मंत्र

ॐ सीतायै नमः

दिन

शुक्रवार

रंग

पीला

भोग

फल

पर्व

सीता नवमी

विवाह पंचमी

राम नवमी

संक्षिप्त तथ्य

मुख्य भाव

पवित्रता, धैर्य, शक्ति, भक्ति और धर्ममय गृहस्थ जीवन

पवित्र संबंध

मिथिला, भगवान राम, राजा जनक और रामायण

सीता माता की कथा और आध्यात्मिक महत्व

अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।

सीता माता पवित्रता, शक्ति, धैर्य, भक्ति और धर्ममय करुणा की मूर्ति मानी जाती हैं।

सीता माता की कथा

सीता माता सनातन धर्म की सर्वाधिक पूजनीय देवियों में से एक हैं। वे पवित्रता, भक्ति, करुणा, धैर्य और धर्मनिष्ठा की साक्षात् प्रतिमूर्ति मानी जाती हैं। भगवान विष्णु के सातवें अवतार श्रीराम की दिव्य अर्धांगिनी के रूप में उनका विशेष महत्व है। उन्हें माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है और वे जानकी, वैदेही, मैथिली, भूमिजा तथा सिया जैसे अनेक पवित्र नामों से पूजित हैं। सीता माता का जीवन आदर्श चरित्र, अटूट विश्वास और हर परिस्थिति में धर्म का पालन करने की प्रेरणा देता है।
रामायण के अनुसार मिथिला के राजा जनक एक यज्ञ के लिए भूमि जोत रहे थे। उसी समय उन्हें धरती से एक दिव्य कन्या प्राप्त हुई। पृथ्वी से प्रकट होने के कारण उनका नाम सीता रखा गया और वे भूमिजा अर्थात् पृथ्वी पुत्री कहलायीं। राजा जनक ने उन्हें अत्यंत स्नेह और प्रेम से अपनी पुत्री के रूप में पाला। बचपन से ही उनके दिव्य गुण, विनम्रता और करुणा सभी को आकर्षित करते थे।
जब सीता माता विवाह योग्य हुईं, तब राजा जनक ने उनके स्वयंवर का आयोजन किया। स्वयंवर की शर्त थी कि जो भगवान शिव के महान धनुष को उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, वही सीता का वरण कर सकेगा। अनेक राजा और वीर योद्धा प्रयास करने के बाद भी असफल रहे, लेकिन भगवान श्रीराम ने सहजता से धनुष उठाकर उसे भंग कर दिया। इसके पश्चात् सीता माता ने प्रसन्नतापूर्वक श्रीराम के गले में जयमाला पहनाई और उनका विवाह दिव्य प्रेम, मर्यादा और आदर्श दांपत्य का प्रतीक बन गया।
कुछ समय बाद जब श्रीराम को चौदह वर्ष का वनवास मिला, तब सीता माता ने राजमहल के सुखों का त्याग कर उनके साथ वन जाने का निश्चय किया। उन्होंने कठिनाइयों और संघर्षों से भरे जीवन को भी धर्म और कर्तव्य समझकर स्वीकार किया। यह निर्णय उनके अटूट समर्पण और धर्मनिष्ठा का अद्भुत उदाहरण है।

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