
सीता माता
यज्ञ के लिए भूमि जोतते समय राजा जनक को हल की रेखा से एक कन्या प्राप्त होती है। वे उसे अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार करते हैं।
सीता माता मूल मंत्र
ॐ सीतायै नमः
दिन
शुक्रवार
रंग
पीला
भोग
फल
पर्व
सीता नवमी
विवाह पंचमी
राम नवमी
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सीता माता की कथा और आध्यात्मिक महत्व
अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।
यज्ञ के लिए भूमि जोतते समय राजा जनक को हल की रेखा से एक कन्या प्राप्त होती है। वे उसे अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार करते हैं।
जनक की पुत्री सीता
यज्ञ के लिए भूमि जोतते समय राजा जनक को हल की रेखा से एक कन्या प्राप्त होती है। वे उसे अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार करते हैं।
हल से बनी रेखा को सीता कहा जाता है। इसी से कन्या का नाम सीता पड़ता है। जनक की पुत्री होने के कारण वे जानकी नाम से भी स्मरण की जाती हैं।
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