सीता माता की कथा और आध्यात्मिक महत्व

सीता माता की कथा और आध्यात्मिक महत्व

यज्ञ के लिए भूमि जोतते समय राजा जनक को हल की रेखा से एक कन्या प्राप्त होती है। वे उसे अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार करते हैं।

जनक की पुत्री सीता

यज्ञ के लिए भूमि जोतते समय राजा जनक को हल की रेखा से एक कन्या प्राप्त होती है। वे उसे अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार करते हैं।
हल से बनी रेखा को सीता कहा जाता है। इसी से कन्या का नाम सीता पड़ता है। जनक की पुत्री होने के कारण वे जानकी नाम से भी स्मरण की जाती हैं।

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