श्री वेंकटेश्वर बालाजी भगवान विष्णु के कलियुग में पूजित स्वरूप हैं। उनकी पूजा श्रद्धा, भक्ति, शुद्धता और पूर्ण समर्पण के साथ की जाती है। भगवान बालाजी भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं तथा जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करते हैं।
तैयारी
प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय से पूर्व उठें
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
पुरुष पीले या सफेद तथा महिलाएँ स्वच्छ पारंपरिक वस्त्र पहन सकती हैं
पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें
भगवान वेंकटेश्वर बालाजी की मूर्ति या चित्र को स्वच्छ वेदी पर स्थापित करें
वेदी को फूलों और दीपक से सजाएँ
मूर्ति का मुख पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर रखें
पूजा सामग्री
भगवान वेंकटेश्वर बालाजी की मूर्ति या चित्र
तुलसी दल
ताजे फूल और माला
अगरबत्ती
घी का दीपक
चंदन
कुमकुम
अक्षत (चावल)
पंचामृत
फल
मिठाई या लड्डू
नारियल
गंगाजल या शुद्ध जल
विष्णु सहस्रनाम पुस्तक
वेंकटेश्वर स्तोत्र या चालीसा
घंटी
संकल्प
- 1
भगवान बालाजी के समक्ष शांत भाव से बैठें
- 2
हाथ जोड़कर उनका ध्यान करें
- 3
अपने नाम और गोत्र का स्मरण करते हुए पूजा का संकल्प लें
- 4
परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक कल्याण की प्रार्थना करें
आवाहन
- 1
दीपक और अगरबत्ती प्रज्वलित करें
- 2
घंटी बजाकर पूजा का प्रारंभ करें
- 3
भगवान वेंकटेश्वर का ध्यान करें
- 4
मंत्र जप करें:
- 5
ॐ नमो नारायणाय
- 6
या जप करें: ॐ श्री वेंकटेशाय नमः
पूजा विधि
- 1
भगवान को शुद्ध जल अर्पित करें
- 2
चंदन का तिलक लगाएँ
- 3
कुमकुम और अक्षत अर्पित करें
- 4
ताजे फूल और पुष्पमाला चढ़ाएँ
- 5
तुलसी दल अर्पित करें
- 6
नारियल, फल और मिठाई का भोग लगाएँ
- 7
पंचामृत अर्पित करें (यदि उपलब्ध हो)
- 8
भगवान के दिव्य स्वरूप का ध्यान करें
- 9
श्रद्धापूर्वक अपनी प्रार्थना अर्पित करें
महत्वपूर्ण
तुलसी दल भगवान विष्णु और वेंकटेश्वर बालाजी को अत्यंत प्रिय है। तुलसी के बिना विष्णु पूजा को अधूरा माना जाता है। श्रद्धा और भक्ति से अर्पित किया गया साधारण भोग भी भगवान को प्रिय होता है।
मंत्र जप और पाठ
- 1
निम्न में से कोई एक या सभी का पाठ करें
- 2
ॐ श्री वेंकटेशाय नमः मंत्र जप
- 3
विष्णु सहस्रनाम
- 4
वेंकटेश्वर स्तोत्र
- 5
श्री विष्णु अष्टोत्तरशतनामावली
- 6
विष्णु चालीसा
- 7
नारायण कवच
- 8
गोविन्द नामस्मरण
आरती
- 1
घी के दीपक से भगवान बालाजी की आरती करें
- 2
भक्ति भाव से आरती गाएँ
- 3
आरती के समय घंटी बजाएँ
- 4
भगवान को प्रणाम कर आशीर्वाद प्राप्त करें
प्रसाद वितरण
- 1
पहले भगवान को भोग अर्पित करें
- 2
कुछ समय ध्यान और प्रार्थना करें
- 3
फिर प्रसाद परिवार और भक्तों में बाँटें
- 4
प्रसाद श्रद्धा और कृतज्ञता के साथ ग्रहण करें
महत्वपूर्ण निर्देश
पूजा के दौरान मन, वचन और कर्म की पवित्रता बनाए रखें
सात्विक भोजन ग्रहण करें
क्रोध, असत्य और नकारात्मक विचारों से बचें
गुरुवार और एकादशी के दिन पूजा विशेष शुभ मानी जाती है
प्रतिदिन तुलसी और विष्णु मंत्र के साथ पूजा करना लाभकारी है
भगवान बालाजी की पूजा में सेवा, दान और विनम्रता का विशेष महत्व है

