
कृष्ण जी
कृष्ण जी उपासना दिव्य प्रेम, आनंद और धर्ममय ज्ञान के लिए की जाती है।
कृष्ण मंत्र
ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणत क्लेश नाशाय गोविंदाय नमो नमः
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संक्षिप्त तथ्य
पाठ शैली
एक समय में एक पाठ
मुख्य भाव
दिव्य प्रेम, आनंद और धर्ममय ज्ञान
कृष्ण जी की कथा और आध्यात्मिक महत्व
अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।
कृष्ण जी उपासना दिव्य प्रेम, आनंद और धर्ममय ज्ञान के लिए की जाती है।
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श्रीकृष्ण जी की कथा
भगवान श्रीकृष्ण की कथा भारतीय धर्म, संस्कृति और दर्शन का अत्यंत गहरा और प्रेरणादायक भाग है। श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना जाता है और उनका जीवन धर्म, भक्ति, प्रेम और कर्म का अद्भुत संदेश देता है।
बहुत समय पहले, द्वापर युग में मथुरा नगरी में राजा उग्रसेन का शासन था। लेकिन उनके ही पुत्र कंस ने उन्हें बंदी बनाकर राजसत्ता अपने हाथ में ले ली थी। कंस अत्यंत क्रूर, अहंकारी और अत्याचारी राजा था, जिससे प्रजा अत्यधिक दुखी रहती थी।
एक दिन आकाशवाणी हुई कि कंस की बहन देवकी का आठवां पुत्र उसका नाश करेगा। यह सुनकर कंस भयभीत हो गया और उसने तुरंत देवकी तथा उनके पति वासुदेव को कारागार में डाल दिया। कारागार में एक-एक करके देवकी के छह पुत्रों को कंस ने मार दिया। सातवां पुत्र, बलराम, योगमाया के प्रभाव से देवकी के गर्भ से रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित हो गया।
इसके बाद जब आठवें पुत्र का जन्म हुआ, तो वह कोई साधारण बालक नहीं था, बल्कि स्वयं भगवान विष्णु का अवतार थे — श्रीकृष्ण। उनके जन्म के समय चमत्कारिक घटनाएँ हुईं, कारागार के पहरेदार गहरी नींद में सो गए, सभी ताले अपने आप खुल गए और यमुना नदी का जल शांत हो गया। वासुदेव ने दिव्य प्रेरणा से नवजात कृष्ण को एक टोकरी में रखा और उन्हें गोकुल में नंद बाबा और माता यशोदा के घर पहुँचा दिया। वहीं उन्होंने एक कन्या को लेकर वापस कारागार में रख दिया।
जब कंस ने उस कन्या को मारने का प्रयास किया, तो वह योगमाया के रूप में प्रकट हुई और आकाश में चली गई तथा कंस को चेतावनी दी कि उसका नाश करने वाला बालक जीवित है।
कृष्ण का बचपन गोकुल और वृंदावन में अत्यंत प्रेम और आनंद के साथ बीता। वे नंद बाबा और यशोदा माता के प्रिय पुत्र थे। बाल्यकाल से ही उनकी लीलाएँ अद्भुत और दिव्य थीं। कभी वे माखन चुराकर गोपियों को चिढ़ाते, तो कभी अपने सखाओं के साथ खेलते हुए सभी का मन मोह लेते थे, इसी कारण उन्हें “माखन चोर” भी कहा जाने लगा।
वृंदावन में एक बार सभी लोग इंद्र देवता को प्रसन्न करने के लिए भव्य पूजा की तैयारी कर रहे थे, क्योंकि उनका मानना था कि वर्षा इंद्र की कृपा से होती है। तब बाल कृष्ण ने लोगों को समझाया कि वास्तविक जीवनदायिनी शक्ति तो गोवर्धन पर्वत, गौ माता और प्रकृति है, इसलिए हमें उनकी पूजा करनी चाहिए। कृष्ण की बात मानकर ब्रजवासियों ने इंद्र पूजा के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा की।
यह देखकर इंद्र देव क्रोधित हो गए और उन्होंने ब्रज में मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी, जिससे पूरा क्षेत्र जलमग्न होने लगा। तब श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और पूरे ब्रजवासियों को उसके नीचे सुरक्षित आश्रय दिया। सात दिनों तक लगातार वर्षा होती रही, लेकिन किसी को कोई हानि नहीं पहुँची। अंततः इंद्र को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी।
इस प्रकार श्रीकृष्ण ने अपने बाल्यकाल में ही यह सिद्ध कर दिया कि सच्ची भक्ति, धर्म और प्रकृति का सम्मान ही जीवन का वास्तविक आधार है।
भगवान श्रीकृष्ण जी का आध्यात्मिक महत्व
श्रीकृष्ण के जीवन से हमें धर्म, कर्म, प्रेम, भक्ति, ज्ञान और जीवन में संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है। वे केवल एक देवता नहीं, बल्कि महान मार्गदर्शक, दार्शनिक, मित्र और धर्म के रक्षक के रूप में पूजे जाते हैं। उनका जीवन सिखाता है कि बुद्धि, भक्ति और सही कर्म के माध्यम से हर कठिनाई का सामना किया जा सकता है।
1. धर्म की स्थापना
कृष्ण धर्म (सत्य और कर्तव्य) की रक्षा करते हैं और अधर्म के विनाश का मार्ग दिखाते हैं।
2. भगवद गीता का ज्ञान
उन्होंने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया, जो जीवन, कर्म और आत्मा का सर्वोच्च ज्ञान है।
3. कर्म योग का संदेश
कृष्ण सिखाते हैं कि “फल की चिंता छोड़कर कर्म करो” — यही कर्म योग है।
4. प्रेम और भक्ति का प्रतीक
उनका जीवन राधा और गोपियों के साथ दिव्य प्रेम और भक्ति का प्रतीक है।
5. जीवन में संतुलन
वे दिखाते हैं कि जीवन में बुद्धि, भाव और कर्म का संतुलन जरूरी है।
6. अहंकार का नाश
इंद्र, कंस जैसे शक्तिशाली अहंकारी व्यक्तियों का अंत करके वे अहंकार के विनाश का संदेश देते हैं।
7. प्रकृति और गौ संरक्षण
गोवर्धन लीला के माध्यम से वे प्रकृति और गौ माता के महत्व को दर्शाते हैं।
8. नेतृत्व और रणनीति
महाभारत में वे महान रणनीतिकार और मार्गदर्शक के रूप में उभरते हैं।
9. संकट में मार्गदर्शन
अर्जुन जैसे योद्धा को मानसिक संकट से निकालकर सही निर्णय की ओर ले जाते हैं।
10. मोक्ष का मार्ग
कृष्ण भक्ति, ज्ञान और कर्म के माध्यम से मोक्ष प्राप्त करने का मार्ग बताते हैं।
निष्कर्ष
श्रीकृष्ण केवल एक ऐतिहासिक या धार्मिक पात्र नहीं हैं, बल्कि वे जीवन जीने की एक पूर्ण दर्शन प्रणाली हैं।
भक्ति नोट
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दिन
गुरुवार
रंग
नीला
भोग
माखन मिश्री
पर्व
जन्माष्टमी • गीता जयंती
लोकप्रिय खोजें
वे सामान्य खोज-वाक्य जिनसे भक्त इस देवता और संबंधित पाठ तक पहुँचते हैं।

