खाटूश्याम जी

खाटूश्याम जी

बर्बरीक घटोत्कच के पुत्र और भीम के पौत्र हैं। उनके पराक्रम को देखकर कृष्ण उनसे युद्ध में भाग लेने के स्थान पर शीश का दान माँगते हैं। बर्बरीक सहमत होते हैं और युद्ध देखने की इच्छा रखते हैं।

खाटूश्याम जी मूल मंत्र

ॐ खाटू श्यामाय नमः

दिन

शुक्रवार

रंग

सिंदूरी

भोग

खीर

खाटूश्याम जी की कथा और आध्यात्मिक महत्व

अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।

बर्बरीक घटोत्कच के पुत्र और भीम के पौत्र हैं। उनके पराक्रम को देखकर कृष्ण उनसे युद्ध में भाग लेने के स्थान पर शीश का दान माँगते हैं। बर्बरीक सहमत होते हैं और युद्ध देखने की इच्छा रखते हैं।

बर्बरीक का शीश-दान

बर्बरीक घटोत्कच के पुत्र और भीम के पौत्र हैं। उनके पराक्रम को देखकर कृष्ण उनसे युद्ध में भाग लेने के स्थान पर शीश का दान माँगते हैं। बर्बरीक सहमत होते हैं और युद्ध देखने की इच्छा रखते हैं।
कृष्ण उनके शीश को ऊँचे स्थान पर स्थापित करते हैं ताकि वे युद्ध देख सकें। वे उन्हें कलियुग में अपने समान पूजे जाने का वर देते हैं। खाटू में भक्त बर्बरीक को श्याम बाबा के रूप में पूजते हैं।

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