
विष्णु जी
समुद्र-मन्थन के बाद अमृत का कलश पाकर असुर आपस में झगड़ने लगते हैं। विष्णु मोहिनी का रूप धारण करते हैं। असुर उन्हें अमृत बाँटने का काम सौंप देते हैं और उनका निर्णय स्वीकार करने का वचन देते हैं।
द्वादशाक्षर मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
दिन
गुरुवार
रंग
पीला
भोग
पंचामृत
पर्व
वैकुंठ एकादशी
गीता जयंती
पाठ अनुभाग चुनें
एक अनुभाग चुनें और एकाग्र पठन मोड में पाठ जारी रखें।
विष्णु जी की कथा और आध्यात्मिक महत्व
अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।
समुद्र-मन्थन के बाद अमृत का कलश पाकर असुर आपस में झगड़ने लगते हैं। विष्णु मोहिनी का रूप धारण करते हैं। असुर उन्हें अमृत बाँटने का काम सौंप देते हैं और उनका निर्णय स्वीकार करने का वचन देते हैं।
मोहिनी और अमृत-वितरण
समुद्र-मन्थन के बाद अमृत का कलश पाकर असुर आपस में झगड़ने लगते हैं। विष्णु मोहिनी का रूप धारण करते हैं। असुर उन्हें अमृत बाँटने का काम सौंप देते हैं और उनका निर्णय स्वीकार करने का वचन देते हैं।
मोहिनी देवताओं और असुरों को अलग पंक्तियों में बैठाती हैं और देवताओं को अमृत पिलाती हैं। राहु देवता का वेश बनाकर उस पंक्ति में बैठ जाता है। सूर्य और चन्द्र उसे पहचान लेते हैं। विष्णु चक्र से उसका सिर काट देते हैं, लेकिन अमृत चख लेने के कारण उसका सिर जीवित रहता है।
पाठ अनुभाग चुनें
एक अनुभाग चुनें और एकाग्र पठन मोड में पाठ जारी रखें।

