
नंदी महाराज
शिलाद ऋषि शिव की तपस्या करके ऐसे पुत्र का वर माँगते हैं जो गर्भ से जन्म न ले और मृत्यु से मुक्त हो। शिव नन्दी के रूप में उनके पुत्र होने का वचन देते हैं। यज्ञभूमि में नन्दी का प्राकट्य होता है और शिलाद आनन्द से उनका पालन करते हैं।
नंदी महाराज मूल मंत्र
ॐ नंदी महाराजाय नमः
दिन
सोमवार
रंग
श्वेत
भोग
बूंदी
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नंदी महाराज की कथा और आध्यात्मिक महत्व
अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।
शिलाद ऋषि शिव की तपस्या करके ऐसे पुत्र का वर माँगते हैं जो गर्भ से जन्म न ले और मृत्यु से मुक्त हो। शिव नन्दी के रूप में उनके पुत्र होने का वचन देते हैं। यज्ञभूमि में नन्दी का प्राकट्य होता है और शिलाद आनन्द से उनका पालन करते हैं।
शिलाद ऋषि और नन्दी
शिलाद ऋषि शिव की तपस्या करके ऐसे पुत्र का वर माँगते हैं जो गर्भ से जन्म न ले और मृत्यु से मुक्त हो। शिव नन्दी के रूप में उनके पुत्र होने का वचन देते हैं। यज्ञभूमि में नन्दी का प्राकट्य होता है और शिलाद आनन्द से उनका पालन करते हैं।
बाद में मित्र और वरुण नन्दी की आयु थोड़ी होने की बात कहते हैं। पिता को दुखी देखकर नन्दी शिव का ध्यान और रुद्र-मन्त्र का जप करते हैं। शिव उमा सहित प्रकट होकर उन्हें मृत्यु का भय छोड़ने का आश्वासन देते हैं। वे नन्दी को अपने गणों का प्रधान बनाते हैं और सदा अपने पास रहने का वर देते हैं।
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