
नरसिंह देव
प्रह्लाद की विष्णु-भक्ति से उनके पिता हिरण्यकशिपु क्रोधित होते हैं। वे पूछते हैं कि क्या प्रह्लाद के भगवान सभा के खम्भे में भी हैं। खम्भे पर प्रहार करते ही भगवान नरसिंह प्रकट होते हैं—उनका रूप न पूरा मनुष्य है, न पूरा सिंह।
नरसिंह मूल मंत्र
ॐ नमो नरसिंहाय
दिन
गुरुवार
रंग
पीला
भोग
पंचामृत
पर्व
नरसिंह जयंती
वैकुंठ एकादशी
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नरसिंह देव की कथा और आध्यात्मिक महत्व
अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।
प्रह्लाद की विष्णु-भक्ति से उनके पिता हिरण्यकशिपु क्रोधित होते हैं। वे पूछते हैं कि क्या प्रह्लाद के भगवान सभा के खम्भे में भी हैं। खम्भे पर प्रहार करते ही भगवान नरसिंह प्रकट होते हैं—उनका रूप न पूरा मनुष्य है, न पूरा सिंह।
प्रह्लाद की रक्षा
प्रह्लाद की विष्णु-भक्ति से उनके पिता हिरण्यकशिपु क्रोधित होते हैं। वे पूछते हैं कि क्या प्रह्लाद के भगवान सभा के खम्भे में भी हैं। खम्भे पर प्रहार करते ही भगवान नरसिंह प्रकट होते हैं—उनका रूप न पूरा मनुष्य है, न पूरा सिंह।
सन्ध्या के समय नरसिंह हिरण्यकशिपु को सभा के द्वार पर पकड़कर अपनी जाँघों पर रखते हैं और नखों से उसका वध करते हैं। भक्त इस प्रसंग में प्रह्लाद की अटूट निष्ठा और भगवान की रक्षा को स्मरण करते हैं।
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